
मत दे मुझे शहंशाही ऐ मेरे मालिक ,करम इतना कर कि ताउम्र गैरों के लिए दुआ निकले |जिंदगी जैसी भी तू देगा कुबूल है मुझे ,पर मौत ऐसी हो कि जहाँ रोये , जब मेरे जनाजे का कारवाँ निकले |
~ तरुण तिवारी
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